Thursday, September 11
यह दुनिया खत्म नही हुयी !!
दोस्तों आखिरकार यह दुनिया खत्म नही हुयी !! पिछले १५ दिनों से पूरी दुनिया को डराया जा रहा था कि दुनिया ख़त्म होने वाली है, जिसे भी मौज-मस्ती करनी हो, कर ले। अफवाह ये थी कि बिग-बेंग प्रयोग के बाद हमारी धरती के नीचे एक बड़ा सा ब्लैक होल पैदा होगा और इसमें सारी ज़िन्दगी, प्रकाश, हवा, पानी और जीने के सारे संसाधन समा जायेंगे। यानि कुल मिलकर प्रलय जैसा दृश्य होगा और सृष्टि का अंत हो जाएगा।
ज़ाहिर है वैज्ञानिक जहाँ इस प्रयोग को काफी उत्सुकता और भविष्य को ध्यान में रखकर सब कुछ कर रहे थे वहीँ इस दुनिया में ऐसे लोगों कि भी कोई कमी नही थी जो भय और आतंक मचाना चाहते थे।
माना जाता है कि इस प्रयोग में यूरोप समेत बाकी दुनिया कि हिस्सेदारी थी, वहीँ अमेरिका इस महा प्रयोग से अलग-थलग रहा। दुनियाभर में फैले ग़लत संदेश की एक बहुत बड़ी वजह ये रही कि लोगों को सही तरीके से बताया नही गया। या कहें कि अफवाह को फैलने का मौका दिया गया॥
तस्वीर का एक दूसरा पहलु, मान लें कि अगर दुनिया ख़त्म भी हो जाती तो क्या होता?? शायद कुछ नही। मुझे कोई अफ़सोस नही होता। जिस तरह का पाप और भ्रष्टाचार यहाँ फ़ैल रहा है..बेहतर होता कि दुनिया ख़त्म हो जाती। फ़िर शायद एक अच्छी दुनिया बनाई जा सकती थी। उस तरह से, जैसे कोई ईमारत जर्जर हो जाती है, हम उसमें मरम्मत नही कर सकते। ज़्यादा सम्भावना है कि हम उसे गिरा देते हैं।
यह दुनिया कितनी जीने लायक रह गयी है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ पैसे के लिए भाई भाई को मार रहा है। बाप बेटे को मार रहा है, बेटा बाप को मार रहा है। कुछ भी हो रहा है। दिन-दहाड़े हत्या हो रही है, ५०-१०० रूपये के लिए। क्या लगता है कि यह दुनिया रहने लायक रह गयी है?
गरीब लोग यहाँ दो रोटी नही खा सकते। बच्चे स्कूलों में जा नही सकते। इतने लोगों के सर पर छत नही है।
ऐसे में अगर दुनिया ख़त्म हो ही जाती तो क्या होता? मुझे नही लगता है कि बहुत लोगों को ऐतराज होता।
दुनिया कुछ लोगों के लिए ठीक-ठाक है। जिनके पास सब कुछ है, महज १० प्रतिशत लोगों के लिए। बाकी लोग तो फाकाकशी कर रहे हैं। अपने धार्मिक ग्रंथों पर यकीन करें तो यह दुनिया कई बार ख़त्म हो चुकी है। और हर दफा एक अच्छी दुनिया बनी है। हमें बताया जाता रहा है कि प्रलय जब भी आयेगा तो दुष्टों का अंत हो जाएगा..क्यों चिंता करते हो प्राणी...अगर प्रलय आ रहा है तो आने दो। स्वागत करो, एक बेहतर दुनिया बन जाने दो। कर लेने दो शिव-शंकर को तांडव नृत्य।
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2 comments:
विचारों की अभिव्यक्ति अच्छी है। विचार भी अच्छे हैं। किन्तु दुनिया में अभी उतने पाप तो नहीं हुए कि दुनिया समाप्त हो जाए।
zaroori nahi ki bahut se log mujhse ittefaq rakhein...lekin hamare ved poorano mein kayee dufa duniya khutm hone ka jikra hai...fir nayee bani hai..iska mutlab yeh na lein ki zindagi se pyan nahi karta..
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