ये बदले ज़माने का दस्तूर है.
जब धमाके में मरने वालों की गिनती हमें नहीं डराती है.
खून के कतरे देख हमें आक्रोश नहीं होता है .
शहीदों के माँ-बाप के गुस्से हमें बेमानी लगते हैं...
मौत हमें सस्ती लगने लगती है।
हम माँ बाप के मुहब्बत को तोलने लगते हैं।
लाखों में, करोडों में
हम रोटियां सेंकने लगते हैं
हम आंसू बहाने लगते हैं
हम हंसने लगते हैं
कभी हम गालियाँ बकने लगते हैं।
कभी हम मुस्कुराने लगते हैं
हम नेता हैं कांग्रेस, बीजेपी, शिव सेना, कम्युनिस्ट
सब जगह हम मौजूद हैं।
हम तो वोट के मारे हैं।
कभी कब्र पर चढ़कर भी सियासत करते हैं।
कभी शमशान में भी दो फूल चढा आते हैं।
सियासत के लिए हम खुनी को भी मुआफ करते हैं
हम तो आपके नेता हैं।
गलती हमारी नही है
गलती तो आपकी है
आप ही तो मुझे बार-बार चुनते हैं
फ़िर हमें ही गालियाँ बकते हैं।
हमें मुंबई में जनता ने ताज जाने से रोका है
इतना बड़ा हादसा है...
कल देखा, आज भी देखा
हमारी तस्वीर अख़बार से पूरी तरह से गायब है
यकीन मानिये हमारा दिल जार-जार रोया है।
हम तो नेता हैं,
हमें तो रोने से न रोकिये
फूल चढाने से न रोकिये
फ़िल्म बनाने से न रोकिये
वोह देखिये न
कौन है वोह लाल-लाल होठों वाली नारियां
जो मोम बत्तियां जलाकर
नेताओं से बार बार सवाल कर रही हैं,
जाँच करवाइए
पाकिस्तान की साजिश लगती है।
आईबी को बुलाइए
भाई हमारे पेट पर लात तो न मारिये
समझिये षडयंत्र है
नेता तो पतीत पावन हैं
हम तो सीना चीर कर भी दिखला दें
लेकिन एक मौका और तो दीजिये
अगला ब्लास्ट जब होगा देख लेंगे
मौत की सज़ा हमारी पार्टी को तो न दीजिये
हम नेता, हमें रोने से तो न रोकिये
Thursday, November 6
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4 comments:
तीखी और धारदार अभिव्यक्ति.
जनता ने तो अपने प्रतिनिधि चुने थे, यह नेता बन गए, और ऐसे नेता जो देश और समाज पर गाली हैं. बेशर्म ख़ुद को नेता कहते हैं, जबकि नेतृत्व के नाम पर सिर्फ़ जीरो हैं. कोई इन्हें रोने से न रोके, भगवान करे यह नेता हमेशा रोते रहें.
sundar vichar, samyak vichar.
बहुत अच्छी कविता ब्रज भाई। आप बहुत सुंदर लिख रहे हैं।
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