मुंबई में हुए हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। ऐसा में इसलिए कह रहा हूँ कि जो लोग अमीरी में ज़िन्दगी ऐशो-आराम से गुजार रहे थे उन्हें भी लगने लगा है कि सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ सरकार की ही नही है. पुलिस वालों की ही नही है, सुरक्षा एजेंसियों की ही नही है।सबको कमर कसकर तैयार रहना होगा। तभी आप सही सलामत ऑफिस पहुँच सकेंगे...तभी आपके बच्चे स्कूल जा सकेंगे. तभी आप दो वक्त की रोटी खा सकेंगे. तभी सेंसेक्स चलेगा. विदेशी निवेश आयेगा. हमारा मुल्क तरक्की करेगा.
मुंबई में सी एस टी पर हमने तो देख ही लिया की कैसे पुलिस वालों ने बिना असलहे के आतंकवादियों से दो-दो हाथ किया और उन्हें धरने में भी कामयाब रहे। दूसरी सबसे अहम् बात कि पुलिस वालों के पास सही बुल्लेट प्रूफ़ नही थे...हमने करकरे साहिब को देखा कि वोह जो बुल्लेट प्रूफ़ पहन रहे थे वोह काफी नही था. कुछ वेबसाइट्स पर इस तरह कि खबरें आ रही हैं कि मुंबई के आला अफसरों को दिए गए बुल्लेट प्रूफ़ डिफेक्टिव थे. येही वजह थी कि बहुत से अधिकारी इनका इस्तेमाल नही करते थे...इसके लिए जिम्मेदार कौन है???इसकी जांच हो.
इस्तीफे का नाटक न किया जाए...बड़ा सवाल, कभी भारतीय नौ सेना हिंदुस्तान का गौरव होता था लेकिन नौ सेना पोत "विक्रांत" कि विदाई के बाद दूसरा पोत अभी तक क्यों नही तैनात किया जा सका है. अरब सागर कि इर्द-गिर्द जो रीफ़िनरिएज़ हैं उनकी सुरक्षा के लिए नौ सेना पोत कि निगरानी बेहद ज़रूरी है। कुबेर जहाज़ में जी पी एस सिस्टम लगा था लेकिन फ़िर भी गुजरात पुलिस इससे पकड़ पाने में नाकाम रही. सवाल कई हैं , जिसका कोई जवाब नही मिला है. सर पकड़ कर रोने का मन होता है कि कुबेर काफी समय से बिना लाइसेंस का ही कैसे काम करता रहा. इससे यह बात भी उजागर होती है कि पुलिस के अन्दर भ्रष्ट अधिकारी दो पैसे के लिए देश कि सुरक्षा से समझौता करने में नही पीछे हटते हैं. जिस तरह से एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम काम करता है वैसे हमारे समुद्री इलाकों में क्यों नही है?बड़े स्तर पर सुरक्षा की खामियां दुनिया भर की हैं. लेकिन खामियां गिनाने से ज़्यादा व्यवस्था में बदलाव लाने की ज़्यादा ज़रूरत है. हमारे राजनेता यह देख लें की आप चाहे जिस भी राजनीतिक पार्टी में हैं, जिस भी जाति और धर्म से ताल्लुक रखते हैं. सबसे पहले आप हिन्दुस्तानी हैं. फ़िर कुछ और. है अगर आपके नसों में खून तो वोह हिंदुस्तान के काम आए. एक-एक कतरा बहा दें अपने मुल्क को महफूज़ रखने के लिए.
आपका फ़र्ज़ है कि वैसे नेताओं को, अधिकारियों को बेनकाब करने में हिचके नहीं जो देश के खिलाफ काम करते हैं. हम अपने शहीदों के खून को यूँ ही जाया नहीं होने देंगे. यह मुल्क हम सबका है. चाहे वोह उद्योग पति हों, राजनेता हों, पत्रकार हों, वकील हों, आम आदमी हों. सोने का वक्त नहीं है ये.
Friday, December 5
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2 comments:
आपके विचार बहुत सुंदर है , आप हिन्दी ब्लॉग के माध्यम से समाज को एक नयी दिशा देने का पुनीत कार्य कर रहे हैं ....आपको साधुवाद !
मैं भी आपके इस ब्लॉग जगत में अपनी नयी उपस्थिति दर्ज करा रही हूँ, आपकी उपस्थिति प्रार्थनीय है मेरे ब्लॉग पर ...!
बहुत सही कहा आपने वक्त सोने का नही|वक्त जागने का है|
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