क्या अंतुले मंत्री बने रहेंगे???देखते रहिये सियासत का गन्दा खेल....अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री एआर अंतुले को हेमंत करकरे की मौत के पीछे हिंदू आतंकवादियों का हाथ नज़र आता है। क्योंकि करकरे मालेगाँव ब्लास्ट की जांच कर रहे थे...
अंतुले का क्या किया जाए? क्या वोह सठिया गए हैं..ऐसे लोगों को क्या कहते हैं?
मुंबई की पुलिस, हमारी सुरक्षा एजेन्सी सब ये कह रही हैं कि करकरे पाकिस्तानी आतंकवादी के हाथों मारे गए...भारत इस बात को लेकर सुरक्षा परिषद् में भी गया। बहुत कम मौके पर हिंदुस्तान ने ऐसा किया है।
आख़िर अंतुले किस मिटटी के बने हैं???
क्या उनको राजनीति में रहने का अधिकार है?
क्या उनको मंत्री बना रहने चाहिए??
कौन जवाब देगा?
कौन है जवाबदेह? इस बात का पता चल गया है कि हिंदुस्तान का जितना बड़ा दुश्मन पाकिस्तान है, उससे कहीं बड़ा दुश्मन यहाँ के हमारे नेता ही हैं।
अंतुले यह बोलकर किसको खुश कर रहे हैं। पाकिस्तान को? आई एस आई को? बताइए क्या अंतुले शहीदों कि शहादत का अपमान नही कर रहे हैं?
दो घटनाओं का ज़िक्र यहाँ करना बेहद ज़रूरी हो गया है....कि कैसे हमारी व्यवस्था देशहित को ताक पर रखकर हमारे सियासी हुक्मरानों के इशारों पर काम कर रही है...
*पहली घटना मुंबई हादसे से पहले की है। मालेगाँव से पहली इंटेलिजेंस और पूरी महाराष्ट्र सरकार प्रज्ञा ठाकुर के पीछे लग गयी। आतंकवादियों की खोज में। इसके पीछे यह आशय निकाला गया कि आतंकवादी सिर्फ़ मुस्लिम समुदाय के बीच से ही नही हिंदू समुदाय के बीच से भी हो सकते हैं। इस बात पर किसी को ऐतराज़ नही रहा है। आतंकवादी किसी भी मज़हब से हो सकते हैं। भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत उनको सज़ा मिलनी चाहिए। बगैर किसी भेदभाव के। राष्ट्रहित में यह ज़रूरी हो गया है। इस मुद्दे पर अगर राजनितिक पार्टियाँ रोटियां सेंकती है तो इसका हिसाब जनता नेताओं से ले सकती है।
दूसरी घटना मुंबई की। जब सभी इंटेलिजेंस एजेंसियां पूरी तरह से नींद की आगोश में सोये हुए नज़र आयी। १०० से ज़्यादा हिन्दुस्तानी और विदेशी नागरिक मारे गए। केन्द्र सरकार, विपक्ष सभी संसद में एकजुट हुए इस मुद्दे पर कि आतंक को साथ मिलकर हराया जाए।
लेकिन दुःख होता है कि कुछ अंतुले जैसे नेता गन्दी राजनीति कर रहे हैं. और ऐसा कहकर भी अंतुले मंत्री बने रहेंगे. सियासत का यह भद्दा चेहरा आपके और हमारे सामने है।
देखते रहिये. सियासत के गंदे खेल को. हमें तो शर्म आती है कि ऐसे लोग हमारे नेता हैं। बेक़सूर लोग मारे जा रहे हैं और इन्हें वोट की पड़ी है।


2 comments:
नहीं जी..
अंतुले मंत्री बने रहेंगे क्योंकि हम जनता ही इनको चुन के नेता बनाती है , पहले भी जनता ने ही इन महोदय को मंत्री बनवाया फ़िर बनवा देंगे
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