Sunday, December 28

युद्ध की बात बेमानी

पाकिस्तान ने दुनिया भर से मौत के सामान जमा कर लिए हैं। बहुत सारे आतंकी कैंप बना लिए हों लेकिन लोगों की ज़िन्दगी बचाने के लिए वहां ढंग के हस्पताल नही बन पाए हैं।
मेरी मुलाकात पिछले दिनों सरहद के उस पार पाकिस्तान से आए जावर हुसैन (तस्वीर में) से हुयी। वो इस उम्मीद में हिंदुस्तान आया था कि उसके दोनों कटे हुए हाथ वापस मिल जायें।
चंडीगढ़ के पास जीरकपुर में आकर वाकई उसके दोनों हाथ लगा दिए गए. इसी साल उसके हाथ गेहूं की पिराई करते हुए कट गए थे. गरीब माँ-बाप के पैसे नही थे कि अमेरिका जाकर १० लाख रूपये खर्च करके हाथ लगवा सकते. जबकि यहाँ यह काम महज़ कुछ हज़ार रूपये में हो गया. दूसरे विश्व युद्ध में भारतीय सेना में काम कर चुके लेफ्टिनेंट वोहरा ने इस सेंटर की नींव रखी थी. पहले नकली हाथ और पैर पुणे में बनाये जाते थे लेकिन जीरकपुर में १९७२ से ये प्रोस्थेटिक सेंटर चल रहा है जिसमें नकली हाथ और नकली पैर लगाये जाते हैं. तकनीक बिल्कुल देशी है. इसलिए खर्च कम आता है।
जावर हुसैन की उम्र महज़ १७ साल थी. उसने उम्मीद खो दी थी। शायद उसके हाथ फ़िर कलम थाम सकें।
नेवेदक प्रोस्थेटिक सेंटर ने जावर हुसैन जैसे ज़िन्दगी से नाउम्मीद तकरीबन ६०,००० को नयी ज़िन्दगी और चेहरे पर ढेर सारा मुस्कान दिए हैं. आपको यह बता दूँ की पूरे पाकिस्तान में इस तरह की कोई सुविधा नही है कि वहां कटे हुए हाथ लगाये जा सकते हों. कराची, लाहौर, इस्लामाबाद...कहीं भी यह सुविधा नही है. मुझे साफ़ तौर पर ये लगा कि भारतीय उप- महाद्वीप में ढेर सारे हस्पताल लगाये जाने चाहिए. आज दोनों मुल्कों के लोग लड़ाई की बात करते हैं लेकिन मेरी रूह सिहर जाती है कि अगर दोनों मुल्कों में बड़ी ज़ंग होती है तो कितने लोग अपांग हो जायेंगे, बच्चे बेसहारा हो जायेंगे। लाखों लोग बेशक मारे जायेंगे. आणविक युद्ध जैसे भयावह विनाश की तो आप महज़ कल्पना ही कर सकते हैं. हिरोशिमा और नागाशाकी में तीन-चार पीढियों के बाद भी apang बच्चे पैदा हो रहे हैं।
इस लेख को पढने वाले लोग ज़रूर इस सेंटर को मदद करें. अगर आपके घर के आस-पास में ऐसे लोग हों जिन्हें नकली हाथ-पैर की ज़रूरत हो तो उन्हें बताएं...मैं पता दे रहा हूँ...
Daulat singhwala,zirakpur (पंजाब)Near airport chowk , chandigarhPhone: 0176-2950980172-2747966email:

6 comments:

mehek said...

bahut achha laga padhke un mhashay ke naye haath mile.ye center yuhi karyarat rahe.yudh se kisika bhala nahi hoga.

वरुण जायसवाल said...

अच्छा लगा |
अमन की तमन्ना अब हमारे दिल में है |

महेंद्र मिश्रा said...

युध्ध विकल्प नही है . आपके विचार जानकर बहुत अच्छा लगा .

इंडियन said...

विगत कुछ वर्षों में पकिस्तान से आए कितने ही लोगो का इलाज भारत में सस्ते में किया जा चुका है, यूँ ये कोई एह्सान नहीं है पर भारत की भलमनसाहत का उदाहरण ज़रूर है और पाकिस्तानियों को ये चीज़ समझ्ना चहिये कि वो हमारे विरुद्ध जो बीज बो रहा है अंततः उसकी फ़सल उसी को काटनी है. उसके कई कलाकार भारत में आ कर काम कर रहे है और अपनी आजीविका चला रहे है ऐसे में हमारी पीठ में छुरा भोक कर उसे कुछ हासिल नहीं होने वाला. आपके विचार पढ़ कर सुखद अनुभूति हुई, धन्यवाद.

अशोक मधुप said...

बहुत लाभप्रद जानकारी। बधाई

सबकी कहानी said...

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