Sunday, February 24
नेता जी नेतागिरी छोड़ो
इन दिनों बिहार पर बहुत कुछ लिखा गया। यूं कह सकते हैं की बिहार पर लिखना भी एक फैशन सा बन गया है। वैसे भी कहाँ कम लिखा गया है बिहार पर? कम कहाँ दिखाया गए पिछले १५ साल में बिहार को।
जब भी कोई घटना होती है तो सारे टीवी चैनल कई दिनों तक एक ही फुटेज कई दिनों तक दिखाते रहते हैं। चाहे वह भागलपुर में एक चोर को मोटर साइकिल में बांधकर घसीट कर दिखाने का वाकया हो.या पुलिस कस्टडी से अपराधी को छीनकर उससे पीटने की घटना ..असल में गलती टीवी चैनल की नही है...पिछले कई सालों से जब से ब्रेकिंग न्यूज़ का कांसेप्ट आया है..चैनल्स तस्वीरों को दीखाते हैं...बार बार , जब तक की संपादक को तसल्ली न हो जाए। या दूसरा विरोधी चैनल उनको दिखाना बंद न कर दे।
हमने किसी भी चैनल पर बिहार के बारे में अच्छी तस्वीर नही देखी ...पिछले ५ सालों में। मुझे ऐसा इसलिए कहना पड़ रहा है क्योंकि हमारी नज़र में खबरों की परिभाषा बदल गयी है। हमारे कैमरे लालू की गोशाला में घूमते हैं । हम दीखाते हैं राबडी छठ पूजा कैसे मनाती है.....क्या यही बिहार के विधाता हैं। कुछ ग़लतफ़हमी है बिहार के बारे में जैसे......
१.लालू बिहार की असली तस्वीर है?
२.बिहार के बारे में धारणा है की सारे लोग उन्हीं की तरह से बोलते हैं, जैसे लालू जी बोलते हैं?
३. सभी लोग मसखरे हैं?
४. सभी लोग काले हैं और मजदूरी करते हैं। वगैरह...वगैरह।
असल में बिहार में कई स्थानीय भाषाएं हैं...मैथिली, भोजपुरी, अंगिका, मगही, नागपुरी । जिसमें सभी जगह उम्र में छोटे लोगों को भी आप कह कर बुलाते हैं।
यह सब बातें में इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि बिहार से बाहर लोगों को बिहार के बारे में ज़्यादा जानकारी नही....जब भी मेरे बाहर के दोस्त पंजाब से बिहार जाते हैं, उनको लगता है की उन्हें ट्रेन से उतरते ही लूट लिया जाएगा। ऐसा सच नही। लूट मुम्बई और दिल्ली में हो जाएगा, अगर आप सावधान न हों।
मुझे याद हैं १९९४ में मैंने दिल्ली के दिल समझे जाने वाले इलाके क्नाउट प्लेस में दो लड़को पीटकर उन्हें पुलिस के हवाले किया था... उनका कसूर था की उन्होंने मेरे दोस्त की पत्नी और उनकी साली को अपने साथ कार में बैठने का इशारा किया। बात शाम ६ बजे की थी। कोई लड़की बता दे की ८ बजे के बाद वह अकेली घर जा सकती है। शायद नही। फ़िर बिहार में कैसे उम्मीद कर सकते हैं आप की वहाँ कुछ होता है इसलिए क्योंकि वह बिहार है...यह बात ग़लत है॥
ऐसा कहकर में में बिहार का बचाव नही कर रहा हूँ...बल्कि यहाँ कुछ ऐसे बातों से आपको वाकिफ करना चाहता हूँ जिससे लोग अवगत नही हैं.....
१..क्या बिहार में कानून व्यवस्था ऐसी रही है जैसा अभी है....? नही...बिहार १९६० के दशक तक इस देश का सबसे अच्छा राज्य था। जॉन अप्प्लेबी ने बिहार को अपने किताब में "सबसे बढ़िया राज्य" का दर्जा दिया ..((Bihar was the best administered state.))
२। बिहार में कभी सरप्लस पॉवर था। मेरे गाँव में आजादी से पहले बिजली की तार लगे थे...दूसरी दफा बिजली १९८० के दशक में आया...कुछ महीने यहाँ बिजली रही...फ़िर एक ऐसी निकम्मी सरकार बनी, जहाँ बिजली भी गयी और बिजली के तार और खम्भे भी चले गए। १५ साल हो गए..मेरे गाँव में उजाला नही आया। मुझे याद है की जब में १५ साल का था...तो १० गाँव के लोगों ने बिना सरकारी मदद के ही ५ मील तक बिजली की तार खींच ली थी... इस उम्मीद में की बिजली से सारे मोटर चलेंगे...लेकिन इतने सालों में कुछ नही हो पाया...फ़िर भी किसानों ने खेती की, अनाज पैदा किया। अपने मजबूत हाथों से पानी खींचा। मैंने इतने सालों में नही सुना की किसी बिहारी मजदूर किसान ने आत्महत्या कर ली हो...
खाली हाथों को काम मिलना बंद हो गया...उद्योग बंद हो गए, लोगों ने १९८० के बाद बेपनाह पलायन किया। मुम्बई, दिल्ली, असम, पंजाब हर जगह बिहारी भागे ...दो रोटी कमाने के लिए। चोरी करने नही...
अगर बिहार में पहले ८ घंटे काम करते थे ....पंजाब के खेतों में १८ घंटे काम किया...पसीना बहाया..मुम्बई में काम किया...दिल्ली में बड़े-बड़े मॉल बनाये.... १०० रूपये पाकर। फ़िर गाली खाई...लात खाया।
३.आप देखें तो यह हालत किसने बनाई ? कुछ मुट्ठी भर लोगों ने.. एक ऐसी पार्टी ने...जिसने एक ऐसे आदमी को बिहार का राजा बना दिया जो लोगों को लूटता रहा...दिल्ली में बैठे बैठे लोग तमाशा देखते रहे...ताली बजाते रहे ।
एक वक्त था की बिहार में कांग्रेस के अलावा और किसी पार्टी का कोई नाम नही जनता था....मैं ऐसे बहुत से परिवार को जानता हूँ जो गांधीजी से लेकर अभी तक कांग्रेसी ही बने रहे। क्या इसके पीछे कोई साजिश नही लगता की जब बिहार के लोग पिट रहे थे वहीं कांग्रेस के नेताओं की जुबान पर ताला लगा था।
हमने नही सुना की कोई भैया की पिटाई हुयी हो और कांग्रेस के नेताओं ने इसकी निंदा भी की हो...क्या केन्द्र की सरकार, चाहे किसी भी पार्टी की हो, चुप रहेगी, जब किसी खास राज्य के लोगों पर हमला हुआ हो।
क्या लालू जी सिर्फ़ मुम्बई जाकर राज ठाकरे को छठ पूजा करने की धमकी देंगे... या थोड़ा होम वर्क भी करेंगे...? यह ऐसा समय है जब दुनिया भर में बैठे लोगों को यह सोचना होगा की बिहार और उत्तर प्रदेश को कैसे विकास के रास्ते पर लायें। असल में नीतिश कुमार और बाकी लोगों के साथ बैठकर यह देखिये की कैसे राज्य में काम के मौके पैदा करें। मुलायम भी मायावती के साथ मिलकर पूरे जी जान से काम करें। अमर सिंह पार्टियाँ में जाना छोड़ दें...और राज्य की खातिर बाहर से पैसे लायें....कानून को दुरुस्त करें...पैसा ज़रूर आयेगा...
आतंकवाद की मार झेल चुके पंजाब में जब इतना निवेश हो सकता है, तो बिहार, उत्तर प्रदेश में क्यों नही....लेकिन यह तभी होगा जब घर में भी उसी तरह काम करेंगे, जैसा की बाहर करते हैं... एक बात तो साफ है की बाहर चाहे जितना भी काम कर लो...लोग "भइया" ही कहेंगे...
नेता गिरी बहुत हो गयी नेता जी...कुछ काम करो और लोगों को भी कुछ करने दो...
Friday, February 22
भारतीयों अंग्रेज़ी सीखो!
भारतीयों अंग्रेज़ी सीखो! भारतीयों अंग्रेज़ी सीखो!ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गोर्डन ब्रोंन ने साफ कर दिया है की अगर हमारे मुल्क में आना है तो अंग्रेज़ी सीखो। काफी लोगों को चिंता हो रही है की उनका लन्दन देखने का सपना अधूरा रह जाएगा। मेरी भी अंग्रेज़ी बहुत ख़राब नही है लेकिन बिहारी अंग्रेज़ी वहाँ नही चलेगी..यह ज़ाहिर है। ज़ाहिर है मैं ब्रिटिश एक्सेंट में नही बोल सकूँगा, बहुत कोशिश कर लिया है। शायद अगले जनम में वहीं पैदा हो जाऊं तो कोई बात बने। लेकिन उन अंग्रेजों से यह सवाल करना चाहूँगा क्या वह जब यहाँ राज करने आए थे उन्हें कौन सी अंग्रेज़ी आती थी। फ़िर भी उन्होंने हमारी छाती पर बैठकर मूंग दला। अब हमारी बारी है। हमें भी वहाँ एक बार सेट होने दो हम भी सीख लेंगे अंग्रेज़ी, इसमें कौन सी आफत आ गयी। मुझे ऐसा लग रह है की ब्रोंन साहिब की मति राज ठाकरे ने ख़राब की है...इसलिए पहले कहाँ इंग्लैंड को मेल्टिंग पोट कहाँ जाता था...अब वह भी ठाकरे के सुर में सुर मिलाने लगे..वह दिन दूर नही जब वह कहें इंग्लैंड सिर्फ़ अंग्रेजों के लिए। जैसे मुम्बई सिर्फ़ मराठियों के लिए। दुनिया जिस तरह से सिमट रही है। हमारी सोच भी उसी तरह से सिमट रही है..कसूर किसका है। क्या ब्रिटेन के साउथ हॉल और बर्मिंघम जैसे इलाके में लोग हिन्दी, उर्दू और पंजाबी बोलकर अपना गुजारा नही कर रहे हैं?सबको लगता है की उल्टा बोलने से उनका जनाधार मजबूत होगा लेकिन मैं इस बात पर यकीन नही रखता। फ़ैसला जनता पर छोड़ दीजिये। अगर ऐसा हो रह है तो दुनिया को जोड़ने का क्या फायदा। एक देश में बना दीजिये ५० देश। और उसमें कई राजवाडे फ़िर से। फ़िर पकाने दीजिये सबको अपनी खिचडी। इस खेल का भला है कोई अंत?
Wednesday, February 20
दूल्हा बिकता है बोलो खरीदोगे..........
दूल्हा बिकता है बोलो खरीदोगे..........
धोनी बिक गया, जयसूर्या बिक गया, ब्रेट ली बिक गया। वो भी बिक गए जिन्हें कोई पूछने वाला नही था। ये है माया का चमत्कार। ऐसा भी कह सकते हैं की इकोनोमी में आयी बूम की अब सही तस्वीर हमारे सामने हैं। क्रिकेट में पैसा तो पहले से ही था, अब और पैसा आयेगा।
वो जो अब तक सिर्फ़ बल्ला घुमाते थे अब दिन भर में करोड़पति बन जायेंगे। धोनी ने तो कमाल ही कर दिया, रांची के इस छोरे ने तो ६ करोड़ की कमाई कर ली। इनके पिता एक वाटर पम्प पर अभी भी काम करते हैं।
हरभजन सिंह की फिरकी चले न चले वो भी अब बिग लीग में शामिल हो चुके हैं। युवराज के पापा भी बहुत खुश होंगे, जो मोहाली की तरफ़ से आइकन प्लेयर के तौर पर खेलेंगे। योगराज जी की मुश्किलें कुछ बढ़ जाएँगी क्योंकि युवराज के हर चौके छक्के पर टीवी चैनल वाले उन्हें घेरेंगे। ज़ाहिर है योगराज सिंह को यह सब बिना पैसा ही करना पड़ेगा॥
चलिए देखेत हैं अब बड़े बड़े सुरमा कितनी कमाई कर पाते है। २०-२० ओवर का खेल है तो कमाल का। लेकिन हमारे बाकी खेलों में लगे हुए खिलाड़ियों का क्या होता है...उनकी ज़िंदगी में कब नयी रौशनी कब आयेगी? क्रिकेट में जितना पैसा जा रह हा उसका दसवां हिस्सा भी बाकियों के पल्ले आए तो कई घरों में चूल्हें जल सकते हैं।
पिछले दिनों ख़बर आए की पंजाब के बहुत से गाँव में फूटबाल खेलने वाले खिलाड़ी साइकिल पर दूध बेच रहे हैं। हॉकी खेलने वाली लड़कियां घर मेंखाना बना रही हैं । क्या इनकी तरफ़ भी हमारी नज़र ऐ इनायत होगी..देखिये देखते जाइये ...
धोनी बिक गया, जयसूर्या बिक गया, ब्रेट ली बिक गया। वो भी बिक गए जिन्हें कोई पूछने वाला नही था। ये है माया का चमत्कार। ऐसा भी कह सकते हैं की इकोनोमी में आयी बूम की अब सही तस्वीर हमारे सामने हैं। क्रिकेट में पैसा तो पहले से ही था, अब और पैसा आयेगा।
वो जो अब तक सिर्फ़ बल्ला घुमाते थे अब दिन भर में करोड़पति बन जायेंगे। धोनी ने तो कमाल ही कर दिया, रांची के इस छोरे ने तो ६ करोड़ की कमाई कर ली। इनके पिता एक वाटर पम्प पर अभी भी काम करते हैं।
हरभजन सिंह की फिरकी चले न चले वो भी अब बिग लीग में शामिल हो चुके हैं। युवराज के पापा भी बहुत खुश होंगे, जो मोहाली की तरफ़ से आइकन प्लेयर के तौर पर खेलेंगे। योगराज जी की मुश्किलें कुछ बढ़ जाएँगी क्योंकि युवराज के हर चौके छक्के पर टीवी चैनल वाले उन्हें घेरेंगे। ज़ाहिर है योगराज सिंह को यह सब बिना पैसा ही करना पड़ेगा॥
चलिए देखेत हैं अब बड़े बड़े सुरमा कितनी कमाई कर पाते है। २०-२० ओवर का खेल है तो कमाल का। लेकिन हमारे बाकी खेलों में लगे हुए खिलाड़ियों का क्या होता है...उनकी ज़िंदगी में कब नयी रौशनी कब आयेगी? क्रिकेट में जितना पैसा जा रह हा उसका दसवां हिस्सा भी बाकियों के पल्ले आए तो कई घरों में चूल्हें जल सकते हैं।
पिछले दिनों ख़बर आए की पंजाब के बहुत से गाँव में फूटबाल खेलने वाले खिलाड़ी साइकिल पर दूध बेच रहे हैं। हॉकी खेलने वाली लड़कियां घर मेंखाना बना रही हैं । क्या इनकी तरफ़ भी हमारी नज़र ऐ इनायत होगी..देखिये देखते जाइये ...
Monday, February 18
सफ़र ज़ारी है...
अभी सफ़र ज़ारी है. जिसमें बहुत सी बातें सुननी है, बहुत सी बातें कहनी है । हर हाल में। वक्त नही है किसी के पास पर दो लम्हे चुराकर हम बहुत कुछ समेटना चाहेंगे अपनी कहानी में। यहाँ कई गंभीर बातें भी होंगी.
हँसी हँसी में हम सब कुछ कहना चाहेंगे की हम ग़लत क्यों कर रहे हैं...
क्यों हम चुप हैं जब हम देखते हैं की हमारे आस-पास जो हो रहा है वो ठीक नही है..इसलिए कहिये अपनी बातों को।
आपको पता है की जब आप चुप रहेंगे तो कुछ भी नही बदलेगा। इसलिए कहिये ज़रूर..क्योंकि आपकी चुप्पी कई लोगों को ये लाइसेंस दे देगी की वो अपने खेल खेलते रहें। इसलिए आंखें खोल कर देखिये की कहीं आप भी उनलोगों को शह तो नही दे रहे हैं...
हँसी हँसी में हम सब कुछ कहना चाहेंगे की हम ग़लत क्यों कर रहे हैं...
क्यों हम चुप हैं जब हम देखते हैं की हमारे आस-पास जो हो रहा है वो ठीक नही है..इसलिए कहिये अपनी बातों को।
आपको पता है की जब आप चुप रहेंगे तो कुछ भी नही बदलेगा। इसलिए कहिये ज़रूर..क्योंकि आपकी चुप्पी कई लोगों को ये लाइसेंस दे देगी की वो अपने खेल खेलते रहें। इसलिए आंखें खोल कर देखिये की कहीं आप भी उनलोगों को शह तो नही दे रहे हैं...
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