
पिछले दिनों मैं पंजाब में घूम रहा था, एक ख़ास स्टोरी के सिलसिले में कि किस तरह पंजाब में किसानों के डीएनए पर असर पड़ा है ज़्यादा कीटनाशक इस्तेमाल करने कि वजह से। सबसे बड़ी दिक्कत यह आ रही थी कि किसानों को कैसे समझाऊँ कि डीएनए क्या होता है। फ़िर मेरे ड्राईवर कहा कि डीएनए कि जगह पर अगर आप इसे खून कहते हैं, किसानों को बात समझ मैं आयेगी।
बात सच निकली। किसानों ने यह माना कि वह अपने फसल पर बहुत ज़्यादा कीटनाशक का इस्तेमाल कर रहे हैं। पंजाब के ६ जिलों में किसानों कि सेहत पर पड़ रहे असर को लेकर पंजाबी यूनिवर्सिटी पटिआला ने एक सर्वे किया...जिसके नतीजे चौंकाने वाले थे। २१० में से ७० किसानों के डीएनए डैमेज हुए हैं। यह वैसे किसान और मजदूर थे, जो खेतों में कीटनाशक का छिड़काव करते थे। यह एक ऐसा संकेत हैं, जिसे राज्य और केन्द्र कि सरकारें दरकिनार कर रही है। एक तरफ़ ओर्गानिक खेती के लिए लोग कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ़ लोगों कि सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। यहाँ यह भी देखना उतना ही ज़रूरी होगा कि कीटनाशक खाने से इंसान पर कितना ख़राब असर पड़ रहा है। क्या सरकार के लिए लोगों कि सेहत ज़्यादा अहम् है या कुछ ऐसे लोगों की हितों की रक्षा करना जो कुछ राजनितिक दलों की स्वार्थ का कहीं न कहीं ख्याल रखते हैं।


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