Sunday, May 25

डीएनए का मतलब लाल लहू


पिछले दिनों मैं पंजाब में घूम रहा था, एक ख़ास स्टोरी के सिलसिले में कि किस तरह पंजाब में किसानों के डीएनए पर असर पड़ा है ज़्यादा कीटनाशक इस्तेमाल करने कि वजह से। सबसे बड़ी दिक्कत यह आ रही थी कि किसानों को कैसे समझाऊँ कि डीएनए क्या होता है। फ़िर मेरे ड्राईवर कहा कि डीएनए कि जगह पर अगर आप इसे खून कहते हैं, किसानों को बात समझ मैं आयेगी।

बात सच निकली। किसानों ने यह माना कि वह अपने फसल पर बहुत ज़्यादा कीटनाशक का इस्तेमाल कर रहे हैं। पंजाब के ६ जिलों में किसानों कि सेहत पर पड़ रहे असर को लेकर पंजाबी यूनिवर्सिटी पटिआला ने एक सर्वे किया...जिसके नतीजे चौंकाने वाले थे। २१० में से ७० किसानों के डीएनए डैमेज हुए हैं। यह वैसे किसान और मजदूर थे, जो खेतों में कीटनाशक का छिड़काव करते थे। यह एक ऐसा संकेत हैं, जिसे राज्य और केन्द्र कि सरकारें दरकिनार कर रही है। एक तरफ़ ओर्गानिक खेती के लिए लोग कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ़ लोगों कि सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। यहाँ यह भी देखना उतना ही ज़रूरी होगा कि कीटनाशक खाने से इंसान पर कितना ख़राब असर पड़ रहा है। क्या सरकार के लिए लोगों कि सेहत ज़्यादा अहम् है या कुछ ऐसे लोगों की हितों की रक्षा करना जो कुछ राजनितिक दलों की स्वार्थ का कहीं न कहीं ख्याल रखते हैं।

क्रिकेट के मैदान पर रंगभेद!!!


क्रिकेट को कभी जेंटलमेन गेम कहा जाता था, लेकिन २०-२० क्रिकेट ने इसे उस गहराई कि तरफ़ धकेल दिया जहाँ से इसका वापस आना शायद नामुमकिन हो। पिछले दिनों मोहाली में मुझे रोंयल चैलेन्ज और मोहाली के बीच मैच कवर करने मौका मिला। आम दिनों कि तरफ़ यहाँ भी कम कपडों में लड़कियां नृत्य कर रही थी। लड़के उनकी एक झलक पाने को बेताब थे। इसमें कुछ लड़कियां काफी गोरी-चिट्टी थी, कुछ लड़कियां थीं जिनका रंग काला था। यौवन दोनों में उरोज़ पर। लेकिन फर्क बस इतना कि भगवान् ने दोनों को अलग-अलग रंग में ढाला। खैर यह तो उसी के हाथ में है। लेकिन फ़िर ख़बर मिली कि आयोजकों ने अश्वेत लड़कियों को मैदान से निकाल दिया। मैंने कम से कम कम इन लड़कियों को फ़िर से मैदान में नही देखा। (बाद में आयोजकों ने इसका खंडन किया)।

अब सवाल उठता है कि अगर यह सही है, तो यह बड़ी शर्मनाक घटना है। ज़्यादा दिन नही हुए, जब १९८० के दशक में अफ्रीका की क्रिकेट टीम में अश्वेत खिलाड़ी शामिल नही करने पर हिंदुस्तान ने टीम का बहिष्कार कर दिया था। हिंदुस्तान के इस कदम की बहुत सराहना हुयी थी। हमारे देश की चावी भी एक ऐसे मुल्क के तौर पर रही है जो हमेशा अन्याय के खिलाफ खड़ा रहा है। अहिंसा का रास्ता अपनाकर भारत ने आज़ादी पाई, इसमें कोई शक नही। अभी पता नही कि वह दोनों लड़कियां "अलेशा" और शेरिने अनदेरसन कहाँ हैं और उनके दिल में हिंदुस्तान कि क्या छवि बनी होगी यकीनन एक ऐसे मुल्क कि जहाँ बराबरी कि बातें की जाती है लेकिन ज़मीनी हकीक़त कुछ और है।

कुछ दिनों पहले ही हमने देखा की किस तरह से पूरा देश हरभजन सिंह के साथ खड़ा हो गया, जब उसपर नस्ली मजाक करने का आरोप लगा। आज किसी ने कुछ बोला क्यों नही? टीम की मालकिन प्रीति अच्छी कलाकार होने के साथ एक बहादुर लड़की भी हैं, अगर वाकई वह बराबरी के लिए खड़ा होती है तो उसे इन लड़कियों को फ़िर से मैदान पर उतरना चाहिए।

Saturday, May 17

पंजाब क्यों जल रहा है?


इन दिनों पंजाब जल रहा है, किसान बहुत जल्दबाजी में हैं। लेकिन बहुत कम लोगों को एहसास है कि अपनीं धरती के साथ वो कितना बड़ा अन्याय कर रहे हैं। मुझे धरती माँ से हमदर्दी है इसलिए कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नही जब माँ कह दे बेटा अब मेरे अन्दर वो ताक़त नही रहा, मैं अब अपने बेटों को दो रोटी नही खिला सकती।

सरकार के तौर पर सरे प्रयास हो चुके हैं, लेकिन किसानों कि ज़्यादा उपज लेने के इच्छा अब आत्मघाती साबित हो रही है। रात में आप जब पंजाब में सफर करते हैं तो लगता है कि किसी कि चिता सजाई गयी है...हमारे एक मित्र, जो खेती के लिए लगातार काम कर रहे हैं, कहते हैं यह कुछ नही, सामुहिक आत्मदाह कि तैयारी है॥!!!

किसानों ने इस बार हजारों एकर ज़मीन में लगे गेहूं के बचे खुचे हिस्से में आग लगा दी...इस उम्मीद में कि जल्दी से फ़िर से धान कि खेती कर लें। लेकिन ऐसा करके वह ज़मीन में बाकी बचे मौजूद सारे बेक्टिरिया को जला रहे होते हैं। सरकार सिर्फ़ कानून बनाकर और लोगों को आर्थिक दंड देकर सोचती है कि सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन असल में ऐसा मुमकिन नही है। किसानों को विकल्प देना होगा..बड़े पैमाने पर मूंग कि खेती से ज़मीन मजबूत होगी...साथ ही हजारों लोगों कि सेहत पर आग का जो ख़राब असर है उसे भी रोका जा सकेगा..

हमें ये दिन ना देखना पड़े जब हवा के नाम पर हमें ज़हर मिले...पानी के नाम पर रसायन मिले..और रोटी के नाम पर हमें कीटनाशक मिले। कम से कम आने वाले बच्चों के लिए भी...जीने कि गुंजाईश हम छोड़ दें.








Monday, May 5

किसकी भूख ज़्यादा बड़ी है...?

यह तस्वीर है पंजाब के सबसे बड़े अनाज मण्डी खन्ना कि जहाँ किसान यह विचार कर रहे हैं कि इतने ज़्यादा गेहूं का क्या किया जाए...लेकिन पूरी दुनिया में इन दिनों चर्चा हो रही है अनाज संकट पर....अब यह देखना ज़रूरी है कि किसकी भूख ज़्यादा बड़ी है...और कौन कितना खाता और कितना फेंकता है....
किसकी भूख ज़्यादा बड़ी है। इस विषय पर खूब चर्चा हो रही है।कई देशों में रोटी लेकर दंगे हुए हैं कई देशों ने लेकिन अन्न भण्डार की हिफाज़त के लिए के लिए सेना को लगा दिया है। ज़ाहिर है मसला काफी गंभीर है। और इसे सभी देशों को मिलकर संभालना होगा।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति बुश ने यह कहकर सबको अचम्भे में दाल है हिंदुस्तान और जैसे देशों में लोगों ज़्यादा खाना शुरू कर दिया दिया है। असल में खाने से अनाज कि कमी नही होती है। भारत जैसे देश में ५०० ग्राम खाकर लोग खुश रहते हैं वहीं एक अमेरिकी २४०० ग्राम अनाज हजम कर चुका होता है। हालांकि हमें यह देखने कि आदत नही कि किसकी थाली कितनी रोटी है, लेकिन अमेरिकन रिसर्च इंस्टीच्यूट ने खुलासा किया भारतीयों कि तुलना में अमेरिकी ६ गुना ज़्यादा खाते हैं। अब सारे विकासशील देश यह आरोप लगा रहे हैं कि अनाज कि कमी खाने से नही बल्कि उसका ग़लत उपयोग करने से हुआ है। अमेरिका जितना मक्का
पैदा करता है, उसका ४० फीसदी इन दिनों बायो- फुएल बनाने में किया जा रहा है। इसके लिए ख़ुद अमेरिकी विदेश नीति जिम्मेदार है। और यही वजह है कि भारत और चाइना अमेरिका को दो बड़े हाथी नज़र आ रहे हैं। लेकिन दूसरे को बदनाम करने से पहले अच्छा होगा कि विकसित देश अपने गिरेबान में झाँककर देख लें.
बात समझ में आती है, अमेरिका, फ्रांस सहित कई देशों में अनाज कि भरी किल्लत चल रही है। अब यह वक्त आ गया है कि यह विकसित देश त्राहिमाम कर रहे हैं। लेकिन अभी भी बहुत समय है , अगर विकसित देश भारत और चीन देशों को खेती के नए तकनीक देते रहे फ़िर कोई दिक्कत नही आयेगी..










Friday, May 2

ख़बर की रफ्तार

कुछ महीनों पहले जब लालू प्रसाद यादव रेल बजट पेश कर रहे थे तो उन्होंने घोषणा की थी वह कूली को गैंग मेन बना देंगे। ज़ाहिर है इसके पीछे उनकी राजीतिक मंशा थी...और वह चाहते थे की दलित लोगों के दिलों को जीता जाए। लेकिन आज ही हमने एन डी TV पर रिपोर्ट देखी कि कुली पटना में अंग्रेज़ी सीख रहे हैं। ज़ाहिर है इससे लालू जैसे लोगों को धक्का लगेगा। वह उन्हें ज़्यादा दिन तक बेवकूफ नही बना सकेंगे।
इसी बीच हमें ख़बर मिली है पाकिस्तान से... कि सरबजीत सिंह की फांसी को फिलहाल स्थगित कर दी गयी है...सारे टीवी चैनल दीखा रहे हैं कि खली अमेरिका से दिल्ली आ चुका है...लेकिन हमारी निष्ठा कहीं एक परिवार के लिए मिली खुशी को दिखाने की ज़्यादा है....लेकिन इसी बीच दिल्ली की टीम ने धोनी की टीम को हरा दिया है...खबरों की रफ्तार यही है.