Friday, January 9

तेल के खेल में सरकार चित्त !!!

कहाँ है सरकार? क्या कर रही है? क्या हो रहा है पूरे मुल्क में? सरकार है भी या सो रही है। मालूम नही। मुझे तो लगता है कि यह किसी लड़ाई से कम नही है..!!!
सडकों पर अफरा-तफरी फैली है। हर कोई कहता है टैंक फुल कर दो। टैंक फुल कर दो। कौन है इस अफरा तफरी के लिए जिम्मेदार। चंडीगढ़ से चेन्नई...कोल्कता से लेकर मुंबई, अहमदाबाद सब जगह बूरा हाल है। देश के ३२००० पेट्रोल पम्प में से ८० फीसदी खाली हो चुके हैं। हवाई सेवा पर असर हो चुका है। बच्चे स्कूल नही जा सके कई शहरों में। यह सिर्फ़ तीन दिन के अन्दर हुआ है। पेट्रोल कंपनी और सरकार के बीच काफी दिनों से यह पलक झपकने का खेल चल रहा था। सरकार कोई ऐसी पहल नही कर रही है कि जिससे हड़ताल ख़त्म हो।आर्मी का काम नही है की वोह तेल बेचे। ऐसे में पिस रहे हैं आम लोग, जिनका इस पूरी लड़ाई में कोई कसूर नही है. सरकार ने कुछ दिनों पहले पेट्रोल डीजल और गैस की कीमत कम करने के संकेत दिए लेकिन जनता को राहत मिल पाती उसके पहले ही सरकार के मनसूबे पर पेट्रोलियम कंपनियों ने पानी फेर दिया. अब हम भुगत रहे हैं केन्द्र सरकार के नाकारापन के नतीजे को. जल्द ही चुनाव होने वाले हैं जनता इसे याद रखेगी. बेवकूफी की भी हद है।
पेट्रोल कंपनियां भी सराहने लायक नही हैं जिन्होंने पूरे मुल्क को बंधक बना लिया है। इसमें ज्यादातर अफसरों की सैलरी लाखों में है। लेकिन लोभ का कोई अंत नही है।
क्या मुरली देवडा जवाब देंगे?डॉ मनमोहन सिंह जवाब देंगे?

1 comments:

Suresh Chandra Gupta said...

क्यों परेशान हो रहे हैं? सोनिया ने मनमोहन का विकल्प तय कर लिया है, राहुल गाँधी. प्रणब से उसकी घोषणा भी करवा दी है. कुछ दिन बाद सब ठीक कर देंगे राहुल.