Sunday, January 11

सत्यम का असत्य

अब माथापच्ची करने का समय नहीं, उठकर संभलने का वक्त है। सत्यम ने देश को निराश किया। लोगों की कमाई उडाई. अब कैसे सत्यम को खड़ा किया जाए, सरकार के सामने ये सबसे बड़ी चुनौती है. यह देखकर थोडी राहत मिली है कि केन्द्र ने बिना ज़्यादा वक्त जाया किए किरण कार्निक जैसे आईटी के आइकन को सत्यम को रास्ते पर लाने कि ज़िम्मेदारी दी है. साथ में दीपक पारेख और अच्युतन जैसे जानकर लोग भी हैं. अब ज़्यादा ज़रूरी है कि सत्यम में फ़िर से निवेशकों के विश्वास को बहाल किया जाए. सत्यम ने ही हिंदुस्तान को भारत से बाहर निकालकर इसे सही मायने में इंडिया इंक बनाया. यह नए भारत के उदय की शानदार कहानी थी. लेकिन जिस तरह से सत्यम के रामलिंगा राजू ने निवेशकों के विश्वास के साथ छल किया वो अपने आप में ऐसी घटना थी जिसने भारत के आईटी सुपर पॉवर बनने के सपने को चूर कर दिया है.आईटी इंडिया के लिए ऐसा क्षेत्र रहा है, जहाँ भारत ने अपना झंडा काफी पहले गाड़ दिया था. लाखों लोगों की ज़िन्दगी इसके साथ जुड़ी है, साथ ही साथ भारत का भविष्य भी. लेकिन अभी निवेशकों के यकीन को फ़िर से बहाल करने में ज़रूर वक्त लगेगा. मेरे भी काफी मित्र सत्यम के साथ अमेरिका में नौकरी करते हैं. सत्यम ने उन्हें अच्छी ज़िन्दगी दी. कुछ सालों में ही सत्यम से जुड़े लोग अमीर हो गए. इनके पास घर आ गया. गाड़ी आ गयी. ढेर से पैसे आ गए. लेकिन अब तलवार लटक रही है कि कहीं अमेरिका से वापस उन्हें भारत न वापस बुला लिया जाए. बेरोज़गारी का संकट लोगों के सर पर खौफ बनकर नाच रहा है. भारत और विदेशों में काम कर रहे लोगों कि संख्या भी हजारों में हैं. अब जितना खतरा सत्यम को वापस ट्रैक पर लाने का है उससे कहीं ज़्यादा बड़ा खतरा है इंडिया इंक के सामने. चाइना जैसे देश ऐसे मौके की तलाश में हैं कि कैसे भारत के हाथों से आईटी लीडर का खिताब चीन जाए. यह संकट भारत की अर्थव्यवस्र्था को और ज़्यादा खंगाल सकती है।

1 comments:

shelley said...

insabk bich me sochne ki baat yah hai ki bhrastachar ki ghuspaith har jagah ho chuki hai.