भारत को ऑस्कर नही चाहिए!!!दोस्तों मुझे बहुत खुशी हुयी जब सारे न्यूज़ चैनल पर ये दिखाया जा रहा था कि ऐ. आर. रहमान को "स्लम डॉग मिलियनर "में संगीत देने के लिए गोल्डन ग्लोब अवार्ड से नवाजा गया। मेरा सीना भी फूल गया था। लेकिन अब वापस मेरा सीना पचक गया...उसमें भरी हवा की हवा निकल गयी। वाकई मुझे नही पता था कि इस फ़िल्म में क्या है? इसका कथानक क्या है? पता चला तो फ़िर मुझे घृणा होने लगी कि यह पुरस्कार तो एक तिरस्कार है--भारत का, यहाँ के लोगों का. मजाक है यहाँ की गरीबी का, मुफलिसी का. भारत अब भी विदेशियों के लिए झुग्गियों में रहने वाला शहर है. भारत अब भी सपेरों का शहर है...मदारियों का शहर है.गरीबी बेचों तो अवार्ड मिलता है. गरीबी दिखाओ तो पैसे मिलते हैं. क्या करना है इन पैसों का और किसके लिए सजाना है यह अवार्ड. स्लमडोग में हमारे मुंबई (क्या राज ठाकरे से इजाज़त लेनी होगी हमारे कहने के लिए??) शहर के सबसे बड़े स्लम धारावी को बेचा गया है. गरीबी अभी भी खूब बिकती है पश्चिम में. गोल्डन ग्लोब अवार्ड देने के लिए ज्यूरी बैठी होगी, जहाँ भारत का खूब मजाक उडाया गया होगा. फ़िर सभी सहमत हुए होंगे कि फ़िल्म वाकई शानदार है. यह कुछ नही है. भारत को पीछे धकलने की साजिश है. धारावी की बदसूरती को कैमरा के लॉन्ग शोट, एक्सट्रीम क्लोज़ उप शोट, और हर तरह के सभावित कोणों से फिल्माया गया होगा. मैं हैरान हूँ कि आज भी पश्चिम में लोग भारत के बारे में घटिया सोच रखते हैं. मुझे पूरी उम्मीद थी कि आमिर खान कि फ़िल्म "तारे ज़मीन पर" ऑस्कर की दौड़ में आगे जायेगी. लेकिन हर बार की तरह इसे किसी साजिश की तरह पीछे धकेल दिया गया. हमारे राजकपूर साहेब की बहुत सी फिल्में वहां नही जा सकीं. मदर इंडिया से लोगों को उम्मीद थी, वोह भी ऑस्कर के काबिल थी. दरअसल ऑस्कर जैसे अवार्ड लेने के लिए भारत की गिराया नही जाना चाहिए. इससे बेहतर हो कि भारत के बेहतरीन फिल्मकार और साहित्यकार मिलकर इंडिया का एक अपना ही ऑस्कर शुरू करें. जिसमें विकासशील देश अपने नज़रिए से अपनी चीज़ों कोई देखें. और अगर गरीबी है तो उसका निदान भी सुझाएँ.
(धारावी-चित्र साभार गूगल)((मैं यह बता दूँ कि मैं रहमान साहिब का फैन हूँ. उनकी "वंदे मातरम" एल्बम की याद मेरे दिल में आज भी ताज़ा है, जिसपर हर भारतीयों को गौरव हो सकता है.))


3 comments:
अच्छा लेख ।
ऑस्कर शुरू करने के लिए ख़्याल बुरा नही ।
bahut accha lekh...
कृपया अपनी राय भी ज़रूर लिखें. बहुत अच्छा लिखने से हमें खुशी तो मिलती है लेकिन आपके विचारों से अवगत नही हो पाता हूँ.
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