ज़रदारी मुंबई हमले के बाद कितनी बार झूठ बोल चुका है, इसकी गिनती वोह खुद भूल चुका होगा। ज़रदारी को याद दिलाना होता है कि दो दिन पहले उसने क्या बोला था। दुनिया को बताने के लिए पाकिस्तान ने कहा कि मौलाना मसूद अजहर पाकिस्तान में नज़रबंद है। दो दिन बाद कहा कि वो पाकिस्तान में है ही नही। पाकिस्तान में भारत का कोई मोस्ट वांटेड अपराधी नही है..पाकिस्तान में कोई आतंकी कैंप नही है... आपको यकीन नही है कि ज़रदारी हमेशा झूठ बोलते हैं झूठ के सिवा कुछ बोलते ही नही. अपनी हालत खस्ता होते देख पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी ने यूँ ही अपनी नाकामी का ठीकरा पाकिस्तान के पत्रकारों के सर नही मढ़ दिया। "पाकिस्तान के पत्रकार सबसे बड़े आतंकी हैं।".....
मुंबई हमलों के बाद पाकिस्तान के आधिकारिक बयानों को ज्यादा तवज्जो न दिए जाने से खफा पाक राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने अपने देश के मीडियाकर्मियों को आतंकी करार दिया. "पत्रकार गलत रिपोटिंग कर सरकार के सामने समस्या खड़ी कर रहे ."
मुझे एक बहुत बड़ी वजह यह नज़र आती है की पाकिस्तान में कुछ टीवी चैनल्स ने मोहम्मद कसाब (मुंबई में जिंदा पकड़े गया आतंकी) के पिता का इंटरव्यू दिखाया था, जिसमें उसके परिवार वालों ने साफ़ साफ़ कबूल किया था की वोह पाकिस्तान का नागरिक है.ये स्वीकारोक्ति पाकिस्तान के लिए नकारने लायक नही थी, हालाँकि पाकिस्तान की तरफ़ से हमेशा यह कोशिश रही कि किसी भी तरह दुनिया भर कि मीडिया को कसाब के गाँव तक पहुँचने से रोका जाए. कुछ अख़बारों के अलावा अभी तक कोई भी टीवी चैनल वहां नही पहुँच सका है...कसाब के गाँव से पहले नाका लगाया गया है...ज़ाहिर है पाकिस्तान इस सच्चाई को हर कीमत पर दुनिया से छुपाना चाहती है
...और जहाँ तक ज़रदारी की विश्वसनीयता का सवाल है..तो वोह पूरी दुनिया को पता चल चुका है कि ज़रदारी जो आज बोलते हैं...घंटे भर बाद उस बयान से पलट जाते हैं. आज ज़रदारी जैसा झूठा राष्ट्रपति किसी देश का नही है... जरदारी के इस बयान से चकित पाकिस्तान के एक पत्रकार ने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने आरोप के समर्थन में एक भी ऐसा उदाहरण पेश नहीं किया, जिससे साबित होता हो कि पाकिस्तानी मीडियाकर्मियों ने गलत रिपोटिंग की है।
मीडिया के लिए बहुत मुश्किल हालात है, जब भी पाकिस्तान में कोई तानाशाह आता है लेकिन लोकतान्त्रिक तरीके से चुनी गयी ज़रदारी सरकार की मक्कारी से सभी परेशान हो चुके हैं. ज़रदारी एक औरतखोर और घूसखोर नेता रहा है, उससे ईमानदारी की उम्मीद न किया जाए. जो आदमी अपनी बीवी का कभी न हुआ वोह किसी और का कब तक रहेगा। भारत को हमेशा ख्याल रखना होगा कि वोह एक राष्ट्रपति से नही, एक भेडिये से आतंकी को सौंपने कह रहा है। जिसपर पाकिस्तान में ख़ुद लोग बेनजीर की हत्या में शामिल होने का शक करते हैं।


2 comments:
ब्रजमोहन जी, किसी को लुच्चा साबित करने के लिए लुच्चा कहना जरूरी नहीं...ब्लॉग निजी अभिव्यक्ति का जरिया जरूर है...लेकिन है तो सार्वजनिक माध्यम....लिहाजा हमें किसी दूसरे देश के राष्ट्राध्यक्ष के बारे में टिप्पणी करते वक्त थोड़ी शालीनता जरूर बरतनी चाहिए...जरदारी क्या हैं...इस महान सत्य का खुलासा सिर्फ आप ही कर रहे हैं ऐसा भी नहीं है...ऐसे में शब्दों को खोटा करने का कोई मतलब नहीं...
धन्यवाद
मेरा मतलब लायर से ही था!!
आपकी बातों से बहुत हद तक सहमत हूँ कि मुझे लुच्चा नही कहना चाहिए ज़रदारी को...अपनी भाषागत मर्यादा को ख्याल में रखते हुए. लेकिन लुच्चा तो वही होता है न झूठ बोलता रहता है. जो आदतन या गैर आदतन लुच्चई करता है. लुच्चा को अंग्रेज़ी में भी लायर कहते हैं, बदमाश भी कहते हैं. ज़रदारी से हमदर्दी दिखाने से उम्मीद है कि वोह सुधर जायें. अगर मैं लायर लिखता तो कोई फर्क नही पड़ता.
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