रात भर जग कर बराक ओबामा का शपथ ग्रहण देखता रहा. पूरी दुनिया देख रही थी। मैं कोई अकेला नही था। अश्वेत लोगों की आँखों में खुशी के आंसू थे। अश्वेतों के साथ वहां के श्वेत भी नाच रहे थे. एक दूसरे को चूम रहे थे. रात भर मौज मस्ती चलता रहा. एक अंडरडॉग अफ्रीकन-अमिरिकन बना, दुनिया का सबसे शक्तिशाली आदमी.
ओबामा उस वक्त सत्तानसी हुए जब ख़ुद अमरीका कई देशो में लड़ाई लड़ रहा है। आर्थिक मंदी का सबसे बड़ा खतरा सामने दरपेश हैं। ओबामा ने हमारे भारतीय नेताओं की तरह सब्जबाग नही दिखाए। सीधे मुद्दे की बात की। खतरों की बात की। नागरिको के जिम्मेदारियों की बात की। ये सब सिर्फ़ अमेरिका में ही मुमकिन है। हमें ओबामा अपना लगता है, इसलिए की हमारी त्वचा का रंग उनसे मिलता है। इसलिए हमें खुशी हुयी। और कुछ नही. हम ओबामा के गुणों को आत्मसात कर सकेंगे. ऐसा नही लगता. हमारे नेता यहाँ मर्ज़ का इलाज़ नही बताते, उसे और लंबा खींचने का तरकीब बताते हैं. और वाकई ऐसा करते भी हैं. तभी अमेरिका एक महान देश है. हम पिछले ६० साल में अपने राजनितिक ज़िन्दगी में ज़िम्मेदारी और इमानदारी नही ला सके. देश सेवा का भाव नही जगा सके. बहुत फर्क है अमेरिका में और इंडिया में. पूरे चुनाव अभियान में ओबामा ने यह नही कहा की वोह अश्वेत हैं इसलिए मुझे वोट दीजिये. ये नही कहा कि उनके पुरखों को ट्रेन के फर्स्ट क्लास में बैठने का अधिकार नही था इसलिए वो सत्ता चाहते हैं. "वोह चेंज चाहते हैं. अम्रीका को एक महान राष्ट्र बनाना चाहते हैं. हमारे यहाँ अभी भी अगडों और पिछडों की लड़ाई चलती है. सामाजिक बराबरी को हासिल करने में हम अभी तक नाकाम रहे हैं. अगर कोई दलित मुख्यमंत्री बनता है तो सवर्णों के गाँव में विकास का काम रुक जाता है. ये ही होता है दलितों के साथ भी. कभी मुलायम ओबामा बनते हैं तो कभी दलित की बेटी मायावती. लेकिन ओबामा जैसा व्यक्तित्व और सोच में ठहराव कहीं देखने को नही मिलता.
सभी को साथ लेकर चलने वाला राजनेता अब हिंदुस्तान में नही है.कोई यादवों के नेता है, कोई मराठा है, कोई राजपूतों का नेता है, कोई जाटों का नेता है. कोई बिहारी है, कोई पंजाबी है कोई भइया है, कोई मराठी है, कोई मल्लू है कोई गुज्जू है. सच्चा हिन्दुस्तानी कोई नही है. सच्चा नेता कोई नही है.
मन्दिर के नाम पर लड़ाई, मस्जिद के नाम पर लड़ाई॥ब्लास्ट के नाम पर लड़ाई. आतंकवाद के नाम पर लड़ाई। हिंदुस्तान कहाँ है? किसके दिल में है हिंदुस्तान?
Wednesday, January 21
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3 comments:
बहुत सार्थक बात, बधाई
---आपका हार्दिक स्वागत है
चाँद, बादल और शाम
सही कहा . हम वो सरे गुन अभी तक आत्मसात नहीं कर पाये हैं.
लेकिन निष्कर्ष क्या निकालता है ?
हमें भी एक ओबामा खोजना होगा.
बिल्कुल वैसा ही जो की भारतीय समाज के मार्जिन की उपज हो.दलित उपेक्षित समुदाय का लाडला या लाडली.
तथाकथित भारतीय समाज की मुख्यधारा का नहीं .
लेकिन उसकी उम्मीद की धृष्टता की कोई सीमा न हो.
भारत की स्वस्थ और प्रगतिशील धारा में रचा बसा .
जिसे अपने पुरखों के त्याग और शोषण के इतिहास की स्मृति तो हो पर उससे बंधा न हो .अपने आप को महज शिकार न समझे. सारे लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण दे .सबका प्रतिनिधित्व करने का मदद हो जिसमें .
क्या हम सब ओबामा के भारतीय रूप संस्करण के लिए तैयार हैं ?
सही कहा . हम वो सरे गुन अभी तक आत्मसात नहीं कर पाये हैं.
लेकिन निष्कर्ष क्या निकालता है ?
हमें भी एक ओबामा खोजना होगा.
बिल्कुल वैसा ही जो की भारतीय समाज के मार्जिन की उपज हो.दलित उपेक्षित समुदाय का लाडला या लाडली.
तथाकथित भारतीय समाज की मुख्यधारा का नहीं .
लेकिन उसकी उम्मीद की धृष्टता की कोई सीमा न हो.
भारत की स्वस्थ और प्रगतिशील धारा में रचा बसा .
जिसे अपने पुरखों के त्याग और शोषण के इतिहास की स्मृति तो हो पर उससे बंधा न हो .अपने आप को महज शिकार न समझे. सारे लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण दे .सबका प्रतिनिधित्व करने का मदद हो जिसमें .
क्या हम सब ओबामा के भारतीय रूप संस्करण के लिए तैयार हैं ?
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