
कई दिनों के बाद आज धूप खिली है...
बारिशों में जैसे मन का मैल धुल सा गया है
धूप गुनगुनी हो गयी है...
कई दिनों के बाद हवा में गर्मी बढ़ गयी है...
और जैसे आसमान का किनारा भी नज़र आने लगा है...
कितना क़रीब...
कई दिनों के बाद मौसम कितना खुल गया है...
फ़िर भी कितना बेचैन है
ये मन...
आखिर ये मौसम बदलता क्यों है...
और हम भी क्यों बदलते है...
मौसम की तरह...


1 comments:
आखिर ये मौसम बदलता क्यों है...
और हम भी क्यों बदलते है...
मौसम की तरह...
सुंदर लिखा आपने
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