Friday, February 13
कहाँ भूला....कुछ तो नही..
हमारे सपने तलाश लाते हैं
वही पुराने दोस्त
वही पुराने घर..
वही बाग़ बगीचे
वही पुराने इमली के पेढ़
वही पुराने हमसफ़र
वही...
मास्टर साब के हाथों पिटने की सज़ा
वही बसों के पीछे झूलकर स्कूल जाना,
रस्ते में लोगों को मुंह चिढाना
वही साइकिल से गिर कर घुटने का छिल जाना
दूसरे के खेतों से गन्ना चुराना
सब जैसे कल की बात हो
माँ के हाथों बेलने से पिटना
पापा के डर से छत पर छुप जाना
भइया का किताब गुस्से में फाड़ देना...
फ़िर वही फटी किताबें पढ़ना
पुरानी बातें याद करके ऑंखें नम हो जाना
फ़िर यह देखना कि किसी ने देखा तो नही...
हमें लगता है कि हम बाहर से बड़े हो गए हैं
लेकिन हमारे अन्दर का इंसान
वही हसरतें लिए जीता रहता है
छुटपन में जाने को बेकरार
सब कुछ जैसे कल की बात हो...
कुछ नही भूला...
कुछ भी नही भूला
आज भी जिंदा है
हमारे अन्दर वोह बचपन...
जीने दो मुझे..फ़िर से
यह क्या ज़िन्दगी है मेरे दोस्त...
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3 comments:
पुरानी बातें याद करके ऑंखें नम हो जाना
फ़िर यह देखना कि किसी ने देखा तो नही...
-क्या बात है, बहुत खूब!!
पुरानी बातें यही छोटी छोटी आज भी दिल में बसी हैं जो वक्त बेवक्त याद आ जाती है
वही...
मास्टर साब के हाथों पिटने की सज़ा
वही बसों के पीछे झूलकर स्कूल जाना,
रस्ते में लोगों को मुंह चिढाना
वही साइकिल से गिर कर घुटने का छिल जाना
दूसरे के खेतों से गन्ना चुराना
सब जैसे कल की बात हो
माँ के हाथों बेलने से पिटना
पापा के डर से छत पर छुप जाना
भइया का किताब गुस्से में फाड़ देना...
फ़िर वही फटी किताबें पढ़ना......
Bhot sunder tarike se dil k bhav...Bdhai...!!
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