Friday, March 20


वोट फॉर इंडिया....
आज सारी राजनितिक पार्टियाँ अपने मतलब की बातें कर रही है...उन्हें हमारा वोट जो चाहिए। इससे ज़्यादा उन्हें हमसे कोई वास्ता नही है। वोट लिया उसके बाद पहचाने नही जायेंगे। अपने इलाके में नज़र नही आएंगे। यह बाद सिर्फ़ कांग्रेस और बीजेपी के साथ लागू नही होती। सारे नेता तकरीबन ऐसे ही हैं। इनको पहचानिये। और सज़ा दीजिये।
५० से ज़्यादा नेताओं ने संसद जाने के बाद एक भी सवाल नही पुछा। चुन के क्यों गए?
धर्मेन्द्र, गोविंदा और विनोद खन्ना जैसे लोगों ने क्या किया???
क्यों लोग इनको चुनते हैं?? आप और हम सभी वोट देंगे इस दफा...ऐसे लोगों का ज़रूर ख्याल रखियेगा...जो लफ्फाजी करते हैं...वोह संसद में न जाने पाए...
सिर्फ़ भाषण से काम चलानेवाले नेता भी हमारे किस काम के?? भाषण से हमारा पेट नही भरेगा..
पंजाब की एक छोटी सी घटना का ज़िक्र करूंगा...
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल गुरदासपुर से सांसद विनोद खन्ना को यह नसीहत देने को मजबूर हो गए की कम से कम लोगों के जीने-मरने में तो शरीक होईये...इलाके के लोग परिवार जैसे होते हैं कम से कम उनके दुख में तो शामिल तो हो जाइये...जीत तो हम दिला देंगे ही...यह बात मैं नही एक राजनीतिज्ञ बोल रहा था। उफ...कितने शर्म की बात है...
आज बहुत से नेता अपने इलाके में नही जाते..जाते तो सिर्फ़ वोट मांगने...मुझे याद है की मेरे लोक सभा क्षेत्र बांका में एक बार पूर्व प्रधान मंत्री वीपी सिंह के समधी प्रताप सिंह को लोगों ने जीताया था ...वो एक बार मुड़कर नही आए...पाँच साल में एक बार भी नही...यह तो वोटर के साथ दोखा है...ऐसे कई नेता होंगे आपके इलाके में...इन्हें सबक सीखाने का सही वक्त है...
बेहतर की जनता के हाथ में यह विकल्प होना चाहिए की वोह ऐसे नेताओं को सांसद से वापस बुला सकें..सांसद को वापस बुलाने का अधिकार। हिंदुस्तान और यहाँ के लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जनता के पास यह अख्तियार होने चाहिए की वो अपने सांसदों का हिसाब किताब ले सकें। सिर्फ़ चुनाव के वक्त नही बल्कि ५ साल की अवधि में कभी भी।

2 comments:

अबरार अहमद said...

बिलकुल सही कहा आपने। हमें वोट देते समय इस बात का जरूर खयाल रखना चाहिए कि हम जिसे चुनने जा रहे हैं वह उस लायक है कि नहीं। मतदाता को अब जागरूक होना ही पडेगा अपने लिए और देश के लिए। बहुत बढिया लिखा है आपने बधाई।

मा पलायनम ! said...

बेहतर की जनता के हाथ में यह विकल्प होना चाहिए की वोह ऐसे नेताओं को सांसद से वापस बुला सकें..सांसद को वापस बुलाने का अधिकार। हिंदुस्तान और यहाँ के लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जनता के पास यह अख्तियार होने चाहिए की वो अपने सांसदों का हिसाब किताब ले सकें। सिर्फ़ चुनाव के वक्त नही बल्कि ५ साल की अवधि में कभी भी।
सौ टका सहमत सर जी .बहुत अच्छालिखा है आपने .