रामजी की चिडिया राम जी का खेत
खा ले चिडिया भर-भर पेट...
बचपन से यह कविता मैं पढ़ रहा हूँ, जिसमें किसानो की सहृदयता को दिखाया गया है। किसानो को वाकई में एक चिडिया तक की फ़िकर है। लेकिन बात काफी पुरानी हो गयी है। किसान सबका पेट भरता है..लेकिन किसानो की फ़िकर अब कौन करेगा?
देश अब चुनाव के मुहाने पर है। लेकिन वोह किसान जो सबका पेट भरता है, उसकी चर्चा कोई नही कर रहा है। चर्चा हो रही है तो वरुण गाँधी की। चर्चा हो रही है तालिबान की। चर्चा हो रही है की क्या अडवाणी प्रधानमंत्री बन सकेंगे..प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह क्या करेंगे।
किसानो को लेकर रैली की जा रही है..किसानो को हर जगह से ट्रक्टर में भरकर लाया जा रहा है। उनसे ताली बजवाई रही है। हासिल क्या है इन भाषणों से। इन्होने लोकतंत्र को जिंदा रखा हुआ है लेकिन इनके पेट नही भर रहे हैं। क्या यह सिर्फ़ नेताओं का भाषण सुनने के लिए पैदा हुए हैं?
विदर्भ और पंजाब सहित देश के कई हिस्सों में सेंकडों किसानो ने आत्म हत्या कर ली है। मीडिया उस एजेंडा की बात नही कर रही है, जिससे वाकई हमारे देश के ७० फीसदी से ज़्यादा किसानो का वास्ता है।
मैंने पिछले कई महीने से किसानो पर एक भी ढंग की रिपोर्ट न किसी अख़बार में देखी और न ही किसी टीवी चैनल पर किसानो के मुताल्लिक़ कोई ख़बर ही देखी है।
आखिर यह एजेंडा कौन तय कर रहा है?? संपादक, अख़बार, टीवी के मालिक या बाज़ार। कितना बड़ा बाज़ार है यह। जहाँ हमें कुकुरमुत्ते की तरह निकल रहे मॉल को देखकर शाइनिंग भारत का भ्रम होता है।
जहाँ रातों-रात बोर्ड रूम में बैठकर अधिकारी और मंत्री किसी बड़े सेज़ की कल्पना कर लेते हैं।जहाँ यह तय कर लिया जाता है की किसानो की कितनी एकड़ ज़मीन की दरकार होगी? किसानो की ज़मीन करोडों में बिकती है और किसानो को बमुश्किल मिलता है कुछ लाखों रुपये।
ममता बनर्जी टाटा को सिंगूर से भागने के लिए ज़मीन आसमान एक कर देती यह सब इसलिए कि उसे वामपंथियों के खिलाफ एक हथियार मिल जाता है। लेकिन उससे आगे कुछ भी नही।
किसानो की ज़मीन बचाने के नाम पर हरयाणा में कई लोग अपनी सियासत चमकाते हैं लेकिन उससे आगे कोई आगे नही बढ़ता। जहाँ किसानो के लिए एजेंडा तय करने की बात आती है तो कोई कुछ बोलता नही है..
सरकार पिछले साल ६०,००० रूपये की क़र्ज़ माफ़ी की बात की लेकिन क्या इससे हमारे करोडों किसानो की हालत सुधर गयी ? क्या किसान आगे ऋण नही लेंगे? क्या किसान आगे खुदकुशी नही करेंगे...सब चुप हैं। यह चुप्पी खतरनाक है। शर्मनाक है...चुप हो जाना
Monday, March 30
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3 comments:
Aapke Bhai Ki Bhabhi Ki...
Saas Ke Bhai Ki Biwi Ki...
Saas Ke Pati Ke Jamai Ke...
Pote Ki Maa Ki Nanand Ka
Bhai Apka kaun Hai???
jawab dijiye
किसान ग्लैमरस नहीं है. धर्म, मंदिर, वरुण गाँधी, पब, चड्डियाँ ये सभी ग्लैमरस हैं. बाकी ज्ञानदत्त जी दो दिन पहले खच्चर का कर्मयथार्थ खुद ही बता चुके हैं. किसानों की सुध कोई तभी लेगा जब खेत में हल चलाने वाला एक किसान मंत्री बनेगा. नहीं तो कोई उम्मीद नहीं.
किसान सबका पेट भरता है..लेकिन किसानो की फ़िकर अब कौन करेगा?
वास्तव में बहुत शोचनीय स्थिति है उनकी ...
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