बहस चल पड़ी है कि वरुण गाँधी की पहचान क्या है? क्या हैं वरुण? एक हिन्दू, एक पारसी, एक सिख या और कुछ। लेकिन ये तय है कि वोह एक महात्मा तो कतई नहीं हो सकते, भले ही उनके नाम के पीछे गाँधी शब्द जुडा हुआ है। मशहूर लेखक अनिल धारकर ने कुछ दिनों पहले वरुण गाँधी की पहचान पर सवाल उठाये...
वरुण गाँधी के दादा-फिरोज गाँधी (पारसी)
वरुण की दादी-इंदिरा नेहरु (ब्रह्मण)
वरुण के पिता-संजय गाँधी (सेकुलर रेस)
वरुण की माँ-मेनका गाँधी (सिख)
यानी वरुण हैं:५० %सिख
२५ % पारसी
२५ % हिन्दू
कुल जमा वरुण गाँधी सेकुलरवादियों के लिए सही तस्वीर हो सकते थे, लेकिन वरुण ने वोह रास्ता पकडा जो मुश्किल नहीं था। विष वमन करने के लिए किसी योग्यता की दरकार नहीं होती है। वरुण ने किसी खास समुदाय पर हमला किया। उस अंदाज़ में जिस अंदाज़ पर ठाकरे परिवार महारत रखता है...या जिस पर नरेन्द्र मोदी या कुछ सालों पहले तक डॉक्टर प्रवीन तोगडिया ने अपनी सियासत खडा किया। क्या वरुण अपने नाम के साथ गाँधी शब्द लगाकर सियासत में आगे बढ़ सकेंगे, यह देखना होगा। बीजेपी के लिए वरुण गाँधी की ज़रूरत है क्योंकि इनके पास भी एक गाँधी है, जो उनके हिसाब से सोचता और बोलता है..
वैसे राहुल या प्रियंका के लिए भी ये कह पाना संभव नहीं कि उनका धर्मं क्या होगा? वोह कितने कैथोलिक हैं, कितने पारसी हैं और कितने ब्रह्मण , यह जानना ज़रूरी नही है। लेकिन राहुल और प्रियंका ने पिछले कुछ सालों में वोह रास्ता अपनाया जिसमें धुल फांकने की ज़रुरत होती है। लेकिन इन्हें भी कहीं न कहीं गाँधी नाम की ज़रूरत तो है ही।
वरुण को भी गांधी का नाम विरासत में मिला है. लेकिन वरुण अपनी माँ मेनका आनंद गाँधी की तरह सियासत में जो अपना रास्ता अपना चुके हैं, वहां गाँधी नाम को लेकर चलने की ज़रूरत कहाँ रह जाती है।
Tuesday, March 31
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5 comments:
सही लिखा बंधू.
अब 'गाँधी' या तो नोटों
पर छपे नजर आते हैं या
मुन्ना भाई की फिल्मों में.
कांग्रेस को कृतार्थ करता लिखा है. वैसे कौन सा गाँधी संत रहा है?
या तो धारकर साहब का ज्ञान कम है अथवा आपका विश्लेषण, फ़िरोज़ गाँधी नहीं "गुजरात" के "घान्दी" मुसलमान थे, इन्दिरा कैसे ब्राह्मण हो गईं जबकि उन्होंने इसी फ़िरोज़ से शादी कर ली? राजीव भी माइनो से शादी करने को इतने उतावले थे कि चर्च में जाकर ईसाई बन गये थे, प्रियंका का असली इटालियन नाम "बियांका" (BIANKA) था, जबकि राहुल का "रॉल" (RAUL)... अपनी जानकारी दुरुस्त करें फ़िर लिखें…
आपने सही कहा. घान्धी हो या गाँधी..लेकिन तय है इस नाम से चिपके रहना इनकी मजबूरी बन गयी है..अपने पोस्ट को अपने नाम से डालते तो अच्छा लगता. बंधू इतना मुझे पता है कि धर्मं का मतलब कुछ नहीं है जो बड़े लोग हैं. ये नाम और धर्मं का इस्तेमाल करते हैं अपने फायदे के लिए.
Aapki iss vyakhya ki aawashyakta nahi thi, bemaani lekh hai aur haqueeqat se pare bhi. Congress ki chhadm dharmnirpekhsata yadi abhi bhi aapki samajh mein nahee aati to bhagwan aapko sadbuddhi de.
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