Saturday, April 4

पॉश इलाके में रहता हूँ..


मैं एक बड़े मकान में रहता हूँ
जहाँ बड़े-बड़े कमरे हैं
कमरे के साथ बाथ रूम भी है
बाथ रूम में झरने भी चलते हैं।
बड़ी बड़ी खिड़कियाँ है
हवा सांय सांय चलती है
सामने चमकती सड़क है,
जहाँ गाडियां सरपट दौड़ती है...

शहर का पॉश इलाका है
लोगों से मिलता हूँ
तो कहता हूँ कि फलां सेक्टर में रहता हूँ
पास-पड़ोस में ही मंत्री जी भी रहते हैं
जज साहिब की कोठी भी है
फर्लांग भर की दूरी पर

घर से निकलो तो सामने काफी कैफे है
बरिस्ता में भी भीड़ लगी रहती है
यहाँ बड़ी-बड़ी गाडियां का आना-जाना रहता है
शहर का पॉश इलाका है...
जहाँ मैं रहता हूँ

लोग कीमत नहीं पूछते यहाँ पर
सामान खरीद लेते हैं
पैसे बहुत हैं यहाँ
पर मैं खरीद नहीं करता यहाँ
सिर्फ देखता हूँ पैसे का मंज़र
जहाँ मैं रहता हूँ
वहां कोई-मोल भाव नहीं करता

मैं जहाँ रहता हूँ वोह शहर का सबसे पॉश इलाका है...
घर में पति-पत्नी और पांच नौकर रहते हैं...
कई कोठियों मैं तो सिर्फ नौकर ही राज करते हैं...

यह घर मेरा नहीं है...
हम तो भाड़े के घर में रहते हैं
कई सालों से
यह शहर मेरा नहीं है
मैं तो यहाँ किराए पर रहता हूँ...

मैं तो अब भी एक छोटे से गाँव में रहता हूँ
जहाँ मेरे बगीचे में ठंढी हवा चलती है..
जहाँ से बाज़ार अभी भी पांच मील दूर है
मैं तो यहाँ भाड़े पर रहता हूँ...
हर महीने पांच तारीख को रहने की कीमत अदा करता हूँ...
मैं तो सबसे पॉश इलाके में रहता हूँ।

4 comments:

गिरीन्द्र नाथ झा said...

कभी कभी सोचता हूं कि हम अपने आसपास की चीजों को कैसे देख पाते हैं और जब हम उन चीजों को समझ लेते हैं तो लिख देते हैं- पॉश इलाके में रहता हूं।

दिल के करीब लिखकर पढ़ाने के लिए शुक्रिया।

शायदा said...

brij...kiraya kitna hai?
vaise achha laga padhna bas kiraye ki baat sochkar darr lagne laga..

सबकी कहानी said...

सब जगह मंदी का असर है लेकिन चंडीगढ़ को पता नहीं क्या हुआ है..सच है, क्या पूरी ज़िन्दगी किराया ही देते रहेंगे...

संदीप शर्मा said...

यह घर मेरा नहीं है...
हम तो भाड़े के घर में रहते हैं
कई सालों से
यह शहर मेरा नहीं है
मैं तो यहाँ किराए पर रहता हूँ...

मैं तो अब भी एक छोटे से गाँव में रहता हूँ
जहाँ मेरे बगीचे में ठंढी हवा चलती है..
जहाँ से बाज़ार अभी भी पांच मील दूर है
मैं तो यहाँ भाड़े पर रहता हूँ...


बहुत खूबसूरत रचना....