सोचिये क्या होगा जब आपको कहा जाएगा कि आप कृपया जूता उतारकर प्रेस कांफ्रेंस में जायें। मैं तो धार्मिक बातों में टांग नही अडाता लेकिन मुझे दुःख है कि आने वाले दिनों में हम पत्रकार जूता पहनकर पत्रकार सभा में नही जा सकेंगे। भाई जरनैल सिंह ने तो यह शुरुआत कर दी लेकिन खामियाजा हम सबको भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।
आज सुबह गृह मंत्री पी चिदंबरम चंडीगढ़ आए लेकिन उन्होंने कोई कांफ्रेंस नही रखा। हमें मालूम है कि वैसे पत्रकारों के बारें में भी तलाश किया गया जिसका परिवार दिल्ली के सिख दंगों से किसी न किसी तरह से प्रभावित रहा हो।
चंडीगढ़ गेस्ट हाउस में चिदंबरम आए तो हम टीवी पत्रकारों को ५० मीटर दूर ही रखा गया।
हरियाणा निवास में घुसने नही दिया गया। वैसे चिदंबरम पहले जब भी चंडीगढ़ आए तो पत्रकारों को चाय पिलाकर ही जाते थे।
लोग उन्हें मधुरभाषी नेता तौर पर जानते हैं। कभी ऊँची आवाज़ में बात नही
करते। कल के वाकये में हमने देख लिए कि जूता फेंकने की घटना के बाद भी वो शांत भाव से बैठे मुस्कुराते रहे। ((साभार: कार्टून दैनिक भास्कर)एक पत्रकार होने के नाते जरनैल को जगह-जगह जाने और नेताओं से मिलने का स्वाभाविक अधिकार हासिल था। जिसे उन्होंने खो दिया है...एक पत्रकार के तौर पर उनका शायद ही अब कोई भविष्य है। भले ही बहुत सी राजनीतिक पार्टियां उन्हें टिकेट दे रही हो..एक पत्रकार के तौर पर उन्होंने इस पेशे को कलंकित किया है।
पत्रकारिता में हैं तो भावनाओं को काबू में रखें....
मेरा १२-१३ साल का पत्रकारिता का अनुभव है। कई राज्यों में काम किया मैंने। हर जगह आपको जरनैल सिंह जैसे पत्रकार मिल जायेंगे,जो एक पत्रकार कम एक्टिविस्ट ज़्यादा नज़र आते हैं। ऐसे लोगों के लिए किसी भी पार्टी का रास्ता खुला होता है।
(मुझे पता है कि जरनैल का परिवार भी उन हजारों सिख परिवारों में है जो सिख दंगे में प्रभावित रहे। इनको इन्साफ मिलना ही चाहिए) (जरनैल सिंह को ले जाते हुए पुलिसकर्मी)
यहाँ चंडीगढ़ में भी बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो कुछ पार्टियों की दलाली करते हैं। चाहे सरकार अकाली की हो या कांग्रेस कि वोह मुख्मंत्री के करीब नज़र आएंगे। हमें कई दफा कहना होता है कि मेहरबानी करके मुख्मंत्री कुर्सी की के पास से हट जाइये। हमें तस्वीर लेने में दिक्कत हो रही है। कई बार हमें शर्म आती है ऐसे पत्रकारों पर। जरनैल के कृत्य की सबने निंदा की है। उसके पास धारदार तो थी। मेरी जो बात हुयी है दिल्ली के पत्रकारों से सभी कह रहे हैं कि जरनैल बहुत अच्छा इंसान है।
नेता और पत्रकार के बीच एक विश्वास का नाता होता है..जिसे हम सबसे जानते हैं। तभी अपनी कुर्सी को खतरे में डालकर नेता बड़ी खबरें भी देते हैं। लेकिन जरनैल सिंह अपने पत्रकार होने की सीमा को तोड़ दिया। अब क्या ?



1 comments:
बिल्कुल सही लिखा है।
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