जब आँखें टीवी पर उह-आह सुनकर खुली
सुबह मेरी आंखें खुली TV पर उह-आह-आह सुनकर हुयी। रामपुर से सांसद जयाप्रदा बैलगाड़ी से बाढ़ प्रभावित इलाके का दौरा कर रही थी। गाड़ी हिचकोले खा रही थी। हो सकता था कि गाड़ी अगर डूब जाती तो सांसद भी बह जाती.तैरना नहीं आता था, मुंह से आह निकल गयी। समाजवादी पार्टी के सांसद के साथ दौरे को कवर करे स्ट्रिंगर मौके पर तैनात थे. खबर चल गयी. कई चैनलों में हेड लाइन बनकर. इसलिए कि गाड़ी में एक नेता थी, अभिनेत्री थी. नहीं तो किसको पूछना था? अच्छा हुआ कि जया ने खुद अपनी आँखों से देख लिया।
यह पूछना चाहूँगा कि हमारे देश में ऐसी कितनी ही महिलाएं बाढ़ के पानी में हर साल बह जाती है। कोई खबर नहीं बनती. हस्पतालों तक पहुँचने में कई महिलाएं नदी में बह जाती है. बच्चे पानी में बह जाते हैं. यह वाकया अपने देश के हर शहर और कसबे में होता है. लोगों को शहर तक पहुँचने में कई घंटे लग जाते हैं. १२ बजे हस्पताल आने के लिए लोगों को अपने सफ़र कि शुरुआत सुबह ४ बजे करनी पड़ती है. पैदल, नाव और गाड़ी में बैठकर और तैरकर लोग अपनी ज़िन्दगी बचाते हैं. यह अपने हिन्दोस्तान की हकीक़त है. कितनी महिलाओं की आह पहुँचती है आपके टीवी में ? ज़रूर सोचियेगा।
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