Friday, March 26

चंडीगढ़ जज मामले का जिन्न फिर से बाहर...

चंडीगढ़ जज मामले का जिन्न फिर से बाहर...

चंडीगढ़ जज घूस मामले का जिन्न कब्र से फिर बाहर निकल गया है. विवादों में घिरे जज निर्मल यादव फिर से कानून की पेचीदी गलियों में फंस गयीं हैं, जिनसे बाहर निकलना आसान नहीं है. कुछ महीने पहले जस्टिस निर्मल यादव का तबादला उत्तराखंड हो चुका है, लेकिन खुद न्यायपालिका ने जज घूस मामले में अब जो पैमाने तय किये हैं उस पर खरा उतरना न्यायपालिका कि साख के लिए बेहद ज़रूरी हो गया है. चंडीगढ़ की सीबीआई अदालत की राय है कि निर्मल यादव के खिलाफ मामला चले. जांच की प्रक्रिया जहाँ रूक गयी थी, वहीं से शुरू हो.
जज घूस मामले को फिर से पटरी पर लाने का सारा श्रेय चंडीगढ़ के तेज़- तर्रार वकील अनुपम गुप्ता को जाता है, जिन्होंने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट बार असोसियेशन की तरफ से मामला सीबीआई की अदालत में फिर डाल दिया कि जज घूस मामला बंद न हो. ऐसा पहली दफा हुआ है कि "बार-एक्टिविज्म" ने गड़े हुए मुर्दे को उखाड़ कर उसमें जान फूंक दी.
इस पूरी घटना में ऊंगली सीबीआई पर उठ रही है जिसने सुप्रीम कोर्ट को गफ़लत में रखा. चंडीगढ़ की विशेष सीबीआई अदालत में जज घूस मामले की क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल करने से पहले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की राय ली जाने की ज़रुरत थी, लेकिन सीबीआई ने ऐसा नहीं किया.
अचरज की बात यह है कि सीबीआई ने अपने २० पन्ने की रिपोर्ट में कहीं भी यह नहीं कहा कि उसके पास निर्मल यादव के खिलाफ मामला चलने के लिए पर्याप्त सुबूत नहीं है. लेकिन अपने उस अधिकार का इस्तेमाल भी नहीं किया जिसके तहत सीबीआई अगर चाहती तो जांच को जारी रख सकती थी.
मामले की अब तक कई परतें खुल चुकी हैं, इस घपले में और भी कई क़िरदार निकलकर सामने आयें तो ताज्जुब नहीं. रविंदर सिंह, संजीव बंसल, राजीव गुप्ता और निर्मल सिंह जैसे कई लोग जज, वकील और दलालों के बीच चल रहे गोरख धंधे के प्रतीक भर हैं. अब दारोमदार फिर से उसी सीबीआई पर जिसने अदालत में क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल की थी.
उम्मीद की जाती है कि सीबीआई बिना किसी दवाब के काम करेगी और मामले के तह तक पहुंचेगी. हमारी शीर्ष अदालतें भी भ्रष्टाचार मुक्त न्यायपालिका के सपने को हकीक़त में तब्दील करना चाहती है.

3 comments:

Anonymous said...

कैसी चल रही है नई नौकरी, ब्रज बाबू।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

लोगबाग खुले आम कहते नहीं अवमानना के डर से. लेकिन हालात वाकई बड़े चिन्ताजनक हैं.

brajmohan said...

naukri mein maza aa reha hai..apna naam pata diya hota to apko chaay peene ke liye zaroor amantrit karta!!!