Wednesday, June 8

मैंने छह कैबिनेट मिनिस्टर का विकेट लिया: अन्ना

अन्ना को आज सुबह राजघाट से सुना। बाबा रामदेव के साथ जितने लोगों का हुजूम था वैसा अन्ना के साथ नहीं। कुछ सौ लोग रामधून गा रहे थे, संयमित भाषा में सरकार से सवाल पूछ रहे थे। एक सबसे बड़े मार्के की बात यह कि अन्ना का लोगों में असर है। जादू है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वह किसी पार्टी से नहीं जुड़े हैं। अन्ना का गैर राजनीतिक होना सबसे बड़ी ताक़त है। इसलिए तो नेता भी अन्ना जैसे लोगों के साथ खड़ा होकर फोटो खिंचवाना चाहते हैं।
सारा जहां हमारा: अन्ना कहते हैं उनके पास सोने का एक बिस्तर है। खाने के लिए दो प्लेटें हैं। मंदिर के एक कोने में रहते हैं। अब तक ६ कैबिनेट मिनिस्टर का विकेट लिया, ४०० भ्रष्ट अफसरों को घर भेजा। अहिंसा के रास्ते ही सब कुछ संभव हो सका।
त्याग करो: अन्ना कहते हैं कि यह निष्कलंक जीवन होने के कारण संभव हो सका। जीवन त्याग किया। बलिदान किया। इस देश की ऐसी परंपरा है। हजारों साल से ऐसा चल रहा है। तभी जीत होती है।
मैंने त्याग किया, उसका मुझे आनंद मिलता है। मुझे लखपति से ज़्यादा आनंद मिलता है फकीरी में। मैंने ३५ साल से अपने घर को नहीं देखा। परिवार के बच्चों का नाम भी नहीं जानता हूँ। लोगों की सेवा करते रहने में इतना व्यस्त रहा कि समय ही नहीं मिला।
मृत्यु हाथ में: अन्ना कहते हैं गुंडों के साथ लड़ा, उन्हें जेल भिजवाया। अब मौत को मुट्ठी में लेकर घूमता हूँ। जीना है तो देश के लिए मरना है तो देश के लिए।

अंत में एक नारा: अन्ना नहीं आंधी है, भारत देश का गांधी है।

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